➤ गगल एयरपोर्ट से जम्मू के लिए जल्द शुरू हो सकती है सीधी व्यावसायिक उड़ान
➤ वैष्णो देवी जाने वाले कांगड़ा, चंबा, हमीरपुर और ऊना के श्रद्धालुओं को मिलेगी सुविधा
➤ कम विजिबिलिटी में लैंडिंग के लिए नया सिस्टम, एयर स्पेस कंट्रोल भी गगल के हाथों में
कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के गगल एयरपोर्ट से जम्मू के लिए सीधी हवाई सेवा शुरू होने की उम्मीद बढ़ गई है। इस नए हवाई रूट से हिमाचल और जम्मू-कश्मीर के बीच सफर आसान होने के साथ यात्रियों के समय की भी बचत होगी। विमानन कंपनियों ने भी इस रूट पर सेवा शुरू करने में रुचि दिखाई है।
गगल एयरपोर्ट से जम्मू के लिए सीधी उड़ान शुरू होने का लाभ केवल पर्यटकों को ही नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों और धार्मिक यात्रियों को भी मिलेगा। कांगड़ा, चंबा, हमीरपुर, ऊना और आसपास के क्षेत्रों से माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए जम्मू जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह कनेक्टिविटी काफी उपयोगी साबित हो सकती है।
वहीं, जम्मू-कश्मीर से हिमाचल आने वाले पर्यटकों के लिए भी कांगड़ा और धर्मशाला पहुंचना आसान होगा। इससे दोनों क्षेत्रों के बीच पर्यटन, धार्मिक यात्राओं, व्यापार और सामाजिक संपर्क को नई गति मिलने की उम्मीद है।
अगले कुछ महीनों में शुरू हो सकती है पहली उड़ान.
गगल एयरपोर्ट के निदेशक अमित सकलानी के अनुसार इस रूट को शुरू करने से संबंधित औपचारिकताएं पूरी होने के बाद अगले कुछ महीनों में जम्मू के लिए पहली व्यावसायिक उड़ान शुरू हो सकती है।
हालांकि उड़ान शुरू होने से पहले सुरक्षा और नागरिक उड्डयन से जुड़ी आवश्यक मंजूरियां प्राप्त करनी होंगी। इन मंजूरियों के बाद ही एयरलाइन और संबंधित एजेंसियों की ओर से उड़ानों का अंतिम शेड्यूल तय किया जाएगा।
इस नए रूट को गगल एयरपोर्ट के विस्तार और भविष्य में यहां से अन्य नए हवाई मार्ग जोड़ने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
वैष्णो देवी जाने वाले श्रद्धालुओं को बड़ी सुविधा.
कांगड़ा से जम्मू की सीधी उड़ान शुरू होने का सबसे बड़ा लाभ धार्मिक पर्यटन को मिल सकता है। वर्तमान में कांगड़ा और आसपास के क्षेत्रों से माता वैष्णो देवी जाने वाले यात्रियों को सड़क या अन्य कनेक्टिविटी पर निर्भर रहना पड़ता है।
सीधी हवाई सेवा शुरू होने पर कांगड़ा, चंबा, हमीरपुर, ऊना और आसपास के क्षेत्रों से जम्मू पहुंचने का समय कम हो सकता है। इससे बुजुर्ग यात्रियों, परिवारों और समय की कमी वाले श्रद्धालुओं को विशेष सुविधा मिलने की उम्मीद है।
इसी तरह जम्मू-कश्मीर से हिमाचल आने वाले यात्रियों के लिए भी यह रूट उपयोगी होगा। कांगड़ा एयरपोर्ट धर्मशाला और आसपास के पर्यटन क्षेत्रों के लिए प्रमुख हवाई प्रवेश द्वार है।
गगल एयरपोर्ट के विस्तार की भी तैयारी.
गगल एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अपग्रेड करने और बड़े विमानों की लैंडिंग के लिए विस्तार की तैयारी चल रही है। एयरपोर्ट के विस्तार से भविष्य में यहां से अधिक हवाई सेवाओं के संचालन की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
ऐसे में जम्मू के लिए प्रस्तावित सीधी उड़ान को क्षेत्रीय हवाई संपर्क बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। नए रूट शुरू होने से कांगड़ा को देश के अन्य महत्वपूर्ण शहरों से जोड़ने की संभावनाओं को भी बल मिलेगा।
कम विजिबिलिटी में भी लैंडिंग आसान होगी.
गगल एयरपोर्ट पर कम विजिबिलिटी में विमानों की लैंडिंग को सुगम बनाने के लिए आधुनिक तकनीकी व्यवस्था भी की गई है। एयरपोर्ट पर डॉप्लर वेरी हाई फ्रिक्वेंसी ओमनी डायरेक्शनल रेंज यानी डीवीओआर में आधुनिक उपकरण जोड़ा गया है।
एयरपोर्ट निदेशक के अनुसार पहले विजिबिलिटी पांच किलोमीटर से कम होने पर विमानों की लैंडिंग में परेशानी आती थी। खराब मौसम के कारण कई बार उड़ानें रद्द या डायवर्ट करनी पड़ती थीं।
नए सिस्टम से तीन किलोमीटर या उससे कम विजिबिलिटी में भी पायलट को नेविगेशन संबंधी बेहतर जानकारी मिलने की उम्मीद है। इससे खराब मौसम के दौरान उड़ानों के संचालन में मदद मिलेगी।
इस व्यवस्था का लाभ बड़े विमानों के साथ हेलिकॉप्टर संचालन को भी मिल सकता है। कम दृश्यता की स्थिति में लैंडिंग को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने में यह तकनीकी सुधार महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
गगल एयरपोर्ट ने संभाला एयर स्पेस कंट्रोल.
गगल एयरपोर्ट ने अपने एयर स्पेस का नियंत्रण भी पूरी तरह अपने हाथ में ले लिया है। अब 10,500 फीट की ऊंचाई और 12 मील की परिधि में विमानों के संचालन तथा एयर स्पेस कंट्रोल की जिम्मेदारी सीधे गगल एयरपोर्ट से होगी।
एयरपोर्ट की तकनीकी क्षमता में सुधार और एयर स्पेस नियंत्रण मजबूत होने के साथ नए हवाई रूट शुरू करने की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।
कांगड़ा-जम्मू सीधी उड़ान शुरू होने से हिमाचल और जम्मू-कश्मीर के बीच हवाई संपर्क को नया विस्तार मिलेगा। इसका असर धार्मिक पर्यटन, सामान्य यात्रियों, व्यापार और पर्यटन गतिविधियों पर देखने को मिल सकता है।



